कैसे करनी चाहिए मकर संक्रांति की पूजा? क्या दान करने से मिलेगा सौभाग्य ?

मकर सक्रांति का पर्व क्यों हैं ख़ास?

मकर सक्रांति मुख्या रूप से सूर्य का पर्व हैं। हर साल जनवरी के महीने में यह पर्व धूम धाम से मनाया जाता हैं। इस दिन सूर्य देवता धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं। एक राशी से दूसरी राशी में प्रवेश करने की क्रिया को सक्रांति कहते हैं। पौष शुक्ल पक्ष में मकर संक्रांति पर्व मनाया जाता है। मकर सक्रांति भारत और नेपाल में मुख्य रूप से फसल कटाई के त्योहार के रूप में भी मनाया जाता हैं हालांकि पंजाब और हरियाणा में इसे लोहरी के रूप में मनाया जाता हैं। इस दिन से बसंत ऋतू का आगमन भी माना जाता हैं।

कैसे करनी चाहिए मकर सक्रांति की पूजा?

  • मकर सक्रांति के दिन प्रातः सुबह उठकर तिल को पानी में मिलाकार स्नान करना चाहिए।
  • अगर संभव हो तो गंगा स्नान करना चाहिए।

  • स्नान के बाद सूर्यदेव की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इस दिन सूर्यदेव की पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और शरीर के सारे रोग भी नष्ट होते हैं।
  • इस दिन पितरों को याद करना चाहिए और उन्हें तर्पण अवश्य प्रदान करना चाहिए।
  • इस दिन गायत्री मंत्र का पाठ करना चाहिए।
  • इन मंत्रों की भी पूजा करनी चाहिए: ऊं सूर्याय नम: , ऊं आदित्याय नम: , ऊं सप्तार्चिषे नम:

क्या दान करने से मिलेगा सौभाग्य?

मकर सक्रांति के दिन तिल का दान करने का बहुत महत्त्व माना गया हैं। गुड़, तेल, कंबल, फल, छाता आदि दान करने से लाभ मिलता है और पुण्यफल की प्राप्ति होती है। यह दिन सुख और समृद्धि का माना जाता है और इस दिन पवित्र नदी में स्नान, दान और पूजा करने से पुण्य हजार गुना हो जाता है।

पतंग उड़ाने के पीछे क्या है कारण?

इस दिन सब लोग पतंग उडाना शुरू करते है। पतंग उड़ाने के पीछे मुख्य कारण है कुछ घंटे सूर्य के प्रकाश में बिताना। इस समय का सूर्य प्रकाश शरीर के लिए बहुत ही अच्छा माना गया हैं और त्वचा व हड्डियों के लिए अत्यंत लाभदायक होता है।

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