क्या है ‘वैकुंठ एकादशी’ का पुराणिक महत्व?

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Vainkuth Ekadashi-HouseofGod

एक वर्ष में 24 एकादशी आते हैं। उनमें से, वैकुंठ एकादशी विष्णु के रूप में विशेष है, इस दिन भगवान विष्णु स्वर्ग की द्वार खोलते हैं जिससे आप एक शक्तिशाली ऊर्जा तक पहुंच सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि अगर आप इस एकादशी में व्रत रखते हैं तो यह साल की 23 एकादशी के बराबर है। वैकुंठ एकादशी शुक्ल पक्ष के दिसम्बरजनवरी महीने में आती है, इसे मोक्ष एकादशी भी कहते हैं। केरल में इसे स्वर्ग वाथिल एकादशी भी कहा जाता हैं। शास्त्रों के मुताबिक, वैकुंट एकादशी वर्ष का एकमात्र दिन है जब विष्णु आपको अपने दिव्य निवास वैकुंठ तक पहुंच प्रदान करते है, जहां देवी लक्ष्मी बहुतायत और समृद्धि रूप से विष्णु के साथ रहती है।

वैकुंठ का महत्व:

धार्मिक मान्यता के अनुसार, वैकुंठ भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी का निवास स्थान है। वैकुंठ का अर्थ है जहाँ किसी चीज़ की कमी नहीं है। जहाँ अहंकार समाप्त हो जाता है और आप पूरी तरह अपने आपको विष्णु जी को समर्पित कर देते हैं। जब आप वैकुंठ एकादशी का उपवास रखते हैं तो आप मोक्ष प्राप्त कर लेते हैं।

ऐसा माना जाता है की इस दिन विष्णु मंदिर पर पूजा करने से निम्न लाभ मिलते है:

Vaikunth Ekadashi02_HouseofGod
Vaikunth Ekadashi02-HouseofGod
  •                 अधिकार, सामाजिक स्थिति और बीमारी से निवारण
  •                 स्मरणशक्ति, मनोवैज्ञानिक समस्याओं का हल
  •                 खो गया संपत्ति को पुनः प्राप्त कर सकते है
  •                 बाधाओं को दूर कर सकते है 
  •                 जीवन में शुभ-मंगल बना रहता है 
  •                 अपनी संपत्ति को और बढ़ा सकते है
  •                  स्वस्थ एवं दीर्घायु रहते है
  •                  नवग्रहों के दोषों से निवारण
  •                  पुरानी बीमारियों से निवारण और विवाह दोषों से राहत।

वैकुंठ एकादशी व्रत कथा:

वैकुण्ठ एकादशी मानाने के पीछे बहुत दिलचस्प कहानी है। एक बार मुरण नामक दानव के आक्रमण से देवता बहुत परेशान थे, जिसकी वजह से देवता भगवान शिव के पास मदद मांगने गए। लेकिन भगवान शिव ने उन्हें विष्णु जी के पास जाने को कहा, क्योंकि भगवान विष्णु के पास वह हथियार था जिससे मुरण को हराया जा सकता था। जिसके बाद उनका नाम बद्रिकाश्रम पड़ गया। एक दिन जब भगवान विष्णु आराम कर रहे थे तो मुरण ने उन्हें मारने की कोशिश की, इसी बीच उनके शरीर से स्त्री ऊर्जा निकली और मुरण को राख में बदल दिया। जिसके बाद भगवान विष्णु ने उसका नाम एकादशी रखा और उसे वरदान दिया कि इस दिन जो भी व्रत रखेगा उसे सीधे वैकुण्ड में स्थान मिलेगा।

वैकुंठ एकादशी पूजा विधि:

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Vaikunth Ekadashi03-HouseofGod
  • इस दिन भगवान विष्णु की पूजा सुबह और शाम की जाती है। यही पूजा अगले दिन यानी द्वादशी पर भी की जाती है।
  • भगवान विष्णु की धूप, दीप तथा चंदन से उनकी पूजा की जानी चाहिए।
  • तुलसी पत्र अर्पित करते हुए भगवान विष्णु को भोग लगाना चाहिए।
  • इस दिन भगवत गीता व श्री सुक्त का पाठ किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु को कमल के फूल अतिप्रिय हैं। इसलिए जो भक्त कमल के फूल से भगवान विष्णु की पूजा करते हैं वह वैकुंठ धाम को प्राप्त करते हैं।
  • इस दिन खिचड़ी बनाकर और घी व आम का अचार का भोग लगाकर खुद भी वही प्रसाद रूप में खाते हैं।

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