क्यों लगता हैं बासी भोजन का भोग? होती हैं सभी बीमारियाँ खत्म! जानिए कैसे!

होली के सम्पन्न होने के कुछ दिन बाद शीतला अष्टमी मनायी जाती है। इस दिन शीतला माता का व्रत और पूजा करने से शीतला माता बहुत ही प्रसन्न होती है। कुछ जगहों पर सप्तमी तिथि के दिन भी यह पर्व मनाया जाता है, जिसे शीतला सप्तमी कहते हैं। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला मां की पूजा अर्चना की जाती है और पूजा के बाद बासी ठंडा खाना ही माता को भोग लगाया जाता है जिसे “बसौडा़” कहा जाता है।

वही बासी भोजन प्रसाद के रूप में खाया जाता है। शीतल अष्टमी का त्योहार, बसौड़ा के नाम से भी मशहूर है। मान्यता है कि इस दिन के बाद से बासी भोजन खाना बंद कर दिया जाता है। इस व्रत को करने से देवी प्रसन्‍न होती हैं और व्रत करने वाले लोगों  के सभी शीतलाजनित दोष दूर हो जाते हैं। दाहज्वर, पीतज्वर, चेचक, दुर्गन्धयुक्त फोडे, नेत्र विकार आदि रोग भी दूर होते हैं। शीतला माता की पूजा के दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता। आज के समय में शीतला माता की पूजा स्वच्छता की प्रेरणा देने के कारण महत्वपूर्ण है। ऋतु परिवर्तन होने के संकेत मौसम में कई प्रकार के बदलाव लाते हैं और इन बदलावों से बचने के लिए साफ सफाई का पूर्ण ध्यान रखना होता है।

 

शीतला अष्टमी के व्रत के पीछे एक वैज्ञानिक महत्व भी जुड़ा हुआ है। चैत्र मास तक गर्मी बहुत बढ़ जाती है इसलिए इस व्रत के बाद से बासी खाना खाना बंद कर दिया जाता है। कहते हैं जिस तरह शीतला माता शीतलता प्रदान करने वाली हैं, उसी तरह ठंडी और ताज़ी चीजें खाना शुरू कर देना चाहिए ताकि गर्मी से होने वाली बीमारियों से बचा जा सके।

कैसे की जाती हैं शीतला अष्टमी की पूजा:

  • सबसे पहले जल्दी सुबह उठकर ठंडे पानी से स्नान कर लेना चाहिए।
  • व्रत का संकल्प लेना चाहिये और शीतला माता की पूजा करनी चाहिए।
  • पूजा और स्नान के वक्त ‘हृं श्रीं शीतलायै नमः’ मंत्र का मन में उच्चारण करते रहना चाहिए।

  • माता को भोग के तौर पर रात को बनाए मीठे चावल चढ़ाएं जाते हैं। कई लोग इस दिन शीतली माता के मंदिर जाकर हल्दी और बाजरे से पूजा भी करते हैं। पूजा के बाद परिवार के सभी लोगों को प्रसाद देकर एक दिन पहले बनाया गया बासी भोजन खाया जाता है।
  • रात में माता के गीत गाए जाते हैं और पूजा की जाती हैं।
  • कहते हैं कि जिस घर में चेचक से कोई बीमार हो, उसे ये पूजा नहीं करनी चाहिए।
  • शीतली अष्टमी के पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 06: 21 से शाम 06: 41 तक रहेगा।

ऐसी मान्यता है माता शीतला का व्रत रखने से तमाम तरह की बीमारियां दूर हो जाती है। साथ ही व्यक्ति पूरे साल चर्म रोग यथा चेचक और कई बीमारियों से दूर रहता है।

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