गोवर्धन पूजन: बाल कृष्णा की अद्भुत लीला जिससे इंद्रदेव भी हुए थे परास्त..! क्यों पूजते है गोवर्धन राज को..?

गोवर्धन पूजन का हिन्दू संस्कृति में बहुत ही महत्त्व है यह पर्व दिवाली के बाद ही मनाया जाता है घरों में इस दिन 56 भोग बनाएं जाते हैं और भगवान को भोग लगाया जाता है गोवर्धन पूजा के पीछे श्री कृष्णा की एक सुन्दर लीला सम्बंधित है कथा यह है की देवराज इंद्रा को खुद की शक्ति पर बहुत घमंड हो गया था और यही घमंड दूर करने के लिए कृष्णा ने एक लीला रची थी एक दिन ब्रज के सभी लोग खूब पकवान बना रहे थे और किसी विशेष पूजा की तयारी कर रहें थे यह नज़ारा देखकर कृष्णा ने अपनी माँ से प्रश्न किया की यह सब तयारी क्यों..? इस पर उनकी माता ने कहा की यह सब प्रबंध इंद्रा देव की पूजा के लिए है वह वर्षा करते है जिससे अन्न बनता है और हमारी गायों को चारा मिलता है

कृष्णा ने कहा की हमें गोवेर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए क्योंकि हमारी गाएं वही चारा चरती है यह सुनकर सभी ब्रज वासियों ने इंद्र के बजाए गोवर्धन पर्वत की पूजा की जिससे इंद्रा ने क्रोधित होकर खूब बारिश की

भगवान कृष्ण ने अपनी लीला दिखाई और अपनी छोटी उंगली पर गावेर्धन पर्वत को उठा लिया और सबको सुरक्षित किया इंद्रदेव और अधिक वर्षा करने लगे कृष्ण ने दोबारा अपनी लीला से शेषनाग को बारिश की गति को बदलने को कहा और अपने सुदर्शन चक्र से वर्षा की गति नियंत्रि‍त करने को कहा इंद्र को यह एहसास हुआ की उनका मुकाबला किसी सामान्य मनुष्य से नहीं बल्कि साक्षात विष्णु के अवतार “कृष्ण” हैं उन्होंने कृष्णा से माफी मांगी, उनकी अराधना की और भोग भी लगाया इसी के बाद से गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है

  • इस दिन लोग गाएं के गोबर से गोवर्धन पर्वत की प्रतिमा बनाकर उसकी पूजा करते है और भोग लगातें है
  • इस दिन खरीफ फसलों से प्राप्त अनाज के पकवान तथा सब्जियां बनाकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।
  • ब्रज क्षेत्र में इस दिन दीपावली से भी अधिक उल्लास एवं रौनक होती है।
  • गोवर्धन पूजा के साथ-साथ गौ-पूजन की भी तैयारी आरम्भ हो जाती है। सुबह होते ही गायों को नहलाना-धुलाना और उन्हें विभिन्न अलंकारों से सजाना भी इस प्रक्रिया में शामिल है।

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