जानिए काशी की प्रसिद्ध “देव दीपावली” का महत्त्व..!

चाहे शंखों की गूँज हो, हजारों मात्रा में चमचमाते हुए दिएं या आस्था में डूबे हुए भक्त, काशी की प्रसिद्ध देव दीपावली का हर वर्णन लाजवाब है। देश विदेश से हर साल लाखों की संख्या में लोग देव दीपवाली देखने आते हैं। देव दीपावली को देवताओं का दिन भी माना जाता है। देव दीपावली कार्तिक मास की पूर्णिमा में पड़ती है। ऐसी मान्यता है की इस दिन गंगा माँ के रस्ते होकर सारे देवता पृथ्वी पर दिवाली मानाने आते हैं इसीलिए उनके स्वागत में काशी के 84(चौरासी) घाटों को दीयों से रोशन किया जाता है।

देव दीपावली पर ऐसा माना जाता है की इस दिन सभी देवों ने दीप जलाकर दीपावली मनाई थी। ऐसी भी एक प्रसिद्ध मान्यता है की इस दिन देवताओं का पृथ्वी पर आगमन हुआ था इसीलिए सभी लोगों ने खुश होकर इतने दिए जलाएं। देव दीपावली के पर्व का समय बहुत ही जयादा शुभ होता है। इस समय पृथ्वी पर एक सकारात्मक उर्जा का संचार रहता है। यह दिन ऐसा होता है जिसमे पूरे वर्ष सकारात्मक कार्य करने का संकल्प मिलता है।

इस पर्व के सन्दर्भ में और भी कुछ रोचक कहानियाँ सम्बंधित हैं। माना जाता है की इसी पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु ने मत्स्यावतार लिया था। एक मान्यता यह भी है की इसी दिन भगवान् शिव ने त्रिपुर दैत्य का वध किया था और काशी के राजा दिवोदास के अहंकार को नष्ट किया था।

इसीलिए तो कार्तिक माह में आने वाले इस पर्व की इतनी महत्वता है. देव दीपावली देखने के लिए देश-विदेश से लाखों पर्यटक काशी में आते है. इस माह किये हुए स्नान, दान, होम, यज्ञ और उपासना बहुत ही शुभ माना जाता है. इस समय सच्चे मन से सकारात्मक कार्य करने का संकल्प करना चाहिए.

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