तुला संक्रांति 2017: क्या है वह विशेष बदलाव जब तुला राशी में आते है सूर्यदेव..?

सूर्य देव का एक राशी से दूसरी राशी में जाने को तुला संक्रांति कहते है 12 राशियों के हिसाब से 12 सूर्य संक्रांति होती है लेकिन सब में से सबसे अधिक महत्वता मेष, कर्क, तुला और मकर संक्रांति की होती है जब सूर्य देव का तुला राशी में प्रवेश करते हैं तब उसे तुला संक्रांति कहते है तुला संक्रांति को गर्भना संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है जिसे कार्तिक माह के पहले दिन मनाया जाता है इस त्यौहार को सबसे जयादा ओडिशा और कर्नाटक में पूरे हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है कर्नाटक में माँ कावेरी की पूजा करके इस त्यौहार को मनाया जाता है इस साल तुला संक्रांति 17 अक्टूबर को है

  • ओडिशा में तुला संक्रांति का वक्त जो होता है उस दौरान धान के पौधों में दाने आना शुरू हो जाते हैं। इसी खुशी में मां लक्ष्मी का आभार जताने के लिये एक दम ताजे धान चढ़ाए जाते हैं। कई इलाकों में गेहूं और कारा पौधे की टहनियां भी चढ़ाई जाती हैं। मां लक्ष्मी से प्रार्थना की जाती है कि वो उनकी फसल को सूखा, बाढ़, कीट और बीमारियों से बचाके रखें और हर साल उन्हें लहलहाती हुई ज्यादा फसल दें।

  • इस दिन लोग नए कपड़े डालते हैं और कई तरह के पकवान बनाते हैं। सारे परिवार के लोग एक साथ बैठ कर दोपहर का भोजन करते हैं। यही दुआ की जाती है कि आने वाले पूरे साल में उनको भरपूर अनाज मिलता रहे।

  • इस दिन सूर्यदेव की पूजा अर्चना की जाती है

  • कर्नाटक में यह दिन कावेरी संक्रमाना के नाम से मनाई जाती है

  • जब सूर्य तुला राशी में प्रवेश करते है तब सभी लोग कावेरी नदी पर पवित्र स्नान करने के लिए अकत्रिक होते है क्योंकि इस दौरान यहाँ के पानी में एक अद्भुत शक्ति का आवगमन होता है जो हर तरह की बीमारी को दूर कर देता है

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