दशहरा: कहीं 75 दिन तो कहीं दिव्य महोत्सव के रूप में मनाया जाता है यह पर्व! क्या है विभिन्न प्रदेशों का विभिन्न वर्णन?

दशहरा को पूरे भारत में बहुत ही गर्व और हर्सौल्लास के साथ मनाया जाता है।  यह दिवस बुराई के ऊपर अच्छाई के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व सिखाता है की हर मनुष्य को दस प्रकार के पापों जैसे- काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी को परित्याग करके एक अच्छे जीवन जीने का संकल्प लेना चाहिए। इसी दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था। इसीलिए इस दशमी को विजयदशमी के नाम से भी जाना जाता है।

इस अवसर पर जगह-जगह मेले लगते हैं और रामलीला का आयोजन होता है। रावण, मेघनाथ और कुम्भकरण का विशाल पुतला बनाकर उसे जलाया जाता है। विजयदशमी भगवान राम की विजय के रूप में मनाया जाए या दुर्गापूजा के रूप में,  दोनों ही रूपों में यह शक्ति-पूजा और विजय का पर्व है।

यह पर्व विभिन्न प्रदेशों में विभिन्न प्रकार से मनाया जाता है, आइये जानते है कैसे:

  • महाराष्ट्र में यह पर्व सिलंगण नाम से सामाजिक महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। शाम के समय पर सभी लोग, सुंदर वस्त्रों से सुसज्जित होकर गांव की सीमा पार कर शमी वृक्ष के पत्तों को लेकर अपने घर आते है. इन पत्तों को “स्वर्ण” के सामान माना जाता है और बाद में इसका आदान-प्रदान किया जाता है।

  • मैसूर का दशहरा भी बहुत ही जाना-माना है। इस अवसर पर मैसूर महल को दुल्हन की तरह सजाया जाता है। पूरे शहर को दीपमालिका से सजाया जाता है और हाथियों का शृंगार कर भव्य जुलूस निकाला जाता है।

  • बंगाल, ओडिशा और असम में यह पर्व दुर्गापूजा के रूप में मनाया जाता है।

  • बस्तर का दशहरा पर्व सही अर्थों में विजय का दशहरा पर्व कहलाता है। बस्तर का दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है। यहाँ यह पर्व सिर्फ 1-2 दिन का उत्सव नहीं होता। यहाँ पर यह पर्व 75 दिनों तक धूमधाम से मनाया जाता है।

  • नेपाल में भी दशहरा ख़ूब धूमधाम से मनाया जाता है। इसे वहां दशाइन के नाम से जानते हैं। यहाँ पर लोग माँ दुर्गा और भैरव देवता की पूजा करते हैं। नेपाल में इस मौके पर स्थानीय नेवार समुदाय के लोग नृत्य करके जश्न मनाते हैं और अलग अलग देवी देवताओं के मास्क पहन कर सामुदायिक तौर पर उत्सव में शामिल होते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *