दिवाली पर क्यों लाते हैं लक्ष्मी-गणेश की नई मूर्तियाँ..?

दिवाली पर भगवान गणेश और वैभव की दाता माँ लक्ष्मी की पूजा होती है। इस दिन शुभ मुहूर्त में सभी लोग पुरे विधि विधान और श्रधा भाव के साथ महालक्ष्मी, गणेश जी और कुबेर का पूजन करते है और अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखने की याचना करते हैं। दिवाली हिन्दू परंपरा के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार है जो की आने वाले नए वर्ष का प्रारंभ होता है। यह अत्यंत ही शुभ मुहूर्त होता है इसीलिए इस पर्व पर लोग गणेश जी और माँ लक्ष्मी की नई मूर्तियों की खरीदारी करते है और नए कार्यों का प्रारंभ करते है। 

दिवाली पूजन के लिए लक्ष्मी-गणेश की अलग-अलग मूर्तियां उपलब्ध हैं। इन दिनों मिट्टी, प्लास्टिक, लकड़ी और धातुओं से बनीं मूर्तियां, चांदी के लक्ष्मी-गणेश, सोने और चांदी की पानी चढ़ी हुई काफी मूर्तियां बाजारों में उपलभ्द है। इन मूर्तियों की सुंदरता ने आजकल भारतीय बाजारों को रोशन कर रखा है और इन्हें घर में स्थापित करने से भी घर की शोभा और बढ़ जाती है।

पाएं माँ लक्ष्मी, माँ सरस्वती और गणेश जी की सुन्दर मूर्तियाँ:

दिवाली के शुभ अवसर पर भगवान गणेश और माँ लक्ष्मी की नई मूर्तियाँ खरीदने की बहुत ही मान्यता है। हिंदु परिवारों के साथ-साथ यह मान्यता व्यापारी वर्ग में भी काफी देखने को मिलती है। ऐसा इसीलिए क्योंकि दिवाली को नए व्यवसायिक वर्ष का प्रारंभ भी माना जाता है। पुराने समय से व्यावसायिक वर्ग इस दिन लक्ष्मी पूजन के साथ-साथ बही पूजन भी करते आ रहे है। इसमें नया कैलेंडर, नई खता बही, माँ लक्ष्मी, माँ सरस्वती और गणेश जी की प्रतिमाएं लाकर उनका विधि-विधान से पूजन करते हैं और अपने व्यवसाय में समृधि की मनोकामना कर, नववर्ष का आरम्भ करते है।

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