दिवाली 2017 विशेष : महालक्ष्मी पूजन मुहूर्त & विधि और जरूरी बातें जिनका रखना होगा ध्यान..!

दिवाली भगवान राम के अयोध्या आगमन पर हुई थी। इस पर्व को महालक्ष्मी की प्रसन्नता का पर्व भी माना जाता है। दीवाली संसाधनों को देने वाली है। दिवाली के शुभअवसर पर महालक्ष्मी के साथ-साथ विवेक के देवता गणेश जी की भी पूजा करना भी अनिर्वार्य हो जाता है और साथ ही में सरस्वती माँ का भी पूजन किय्या जाता है।

  • आज के दिन सबसे पहला दीप दान मंदिर में करना चाहिए। उसके बाद अपने घर में लक्ष्मी का पूजन करते हुए कमसे कम 5 गाएं के घी के दीपक जलने चाहिए। 5, 7, 11, 21, इत्यादि दीपक अपनी श्रधा के अनुसार जलाने चाहिए। गणेश जी की मूर्ति को लक्ष्मी जी के दायें बिठाना चाहिए।

  • घर का मुख्या द्वार शुभ उर्जा के आगमन को दिखाता है और इसी द्वार से माहालक्ष्मी घर में प्रवेश करती है। अतः घर का मुख्या द्वार विशेष रूप से रंगोली इत्यादि से सजाना चाहिए। तुलसी के गमले रखने चाहिए।

  • इस दिन चांदी का सिक्का, जो धनतेरस के दिन खरीदा होता है और लक्ष्मी जी को दर्शाता है, उसे पंचामृत से स्नान कराना चाहिए और उसका विधिवत पूजन करना चाहिए।

  • इस समय कुबेर और श्री यंत्रो का विधिवत पूजन करना चाहिए और बाद में उन्हें अपने खजाने में स्थान देना चाहिए नहीं तो अपने पूजा घर में उसे स्थान देना चाहिए।

  • इस दिन गुड़ और धनिया (बीज वाली धनिया) का अत्यंत महत्त्व है। इनका भोग जरूर लगाना चाहिए और सबको प्रसाद के रूप में सबको देना चाहिए।

  • घर में गज लक्ष्मी की प्रतिमा लानी चाहिए।

  • पूर्व और उत्तर पूर्व के बीच दिशा धन वृद्धि की बहुत ही महत्वपूर्ण दिशा है। उत्तर दिशा कुबेर और सोम की है जिसका धन से सीधा सम्बन्ध है। पश्चिम दिशा वरुण देव की दिशा कही गयी है। इसीलिए पूर्व, उत्तर पूर्व और उत्तर दिशा की तरफ मुख करके ही पूजन करना चाहिए और घर क इन्ही दिशा में पूजन करना चाहिए। नहीं तो घर के मध्य भाग में पूजन करना चाहिए।

  • प्रदोष काल और निशित काल में आप सभी लोग पूजन कर सकते है। महा-निशित काल साधकों के लिए और तंत्र की साधना के लिए है।

  • इस दिन सबसे शुभ मुहूर्त है श्याम 7:02 से लेकर 8:00 बजे तक। इसके बाद निशित काल का मुहूर्त है 8:15 मिनट से 10:53 मिनट, जो की व्यापारी वर्ग के लिए उत्तम है। महा निषित काल का मुहूर्त 10:56 मिनट से लेकर 1:32 मिनट तक है। उस दिन अमावस्या 12:40 तक है, इसीलिए महानिशित काल की साधना 12:40 से पूर्व हो जानी चाहिए।

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