परशुराम जयंती 2018 – जानें भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम की कहानी

  • परशुराम का अर्थ

परशुराम दो शब्दों से मिलकर बना हैं – परशु मतलब “कुल्हाड़ी” और राम यानी  “पुरुषोत्तम राम”। अगर इन दोनों शब्दों को मिलाएं तो अर्थ हुआ “कुल्हाड़ी के साथ राम ”। जैसे भगवान राम विष्णु जी के अवतार हैं वैसे ही परशुराम भी भगवान विष्णु के अवतार हैं। परशुराम जी को भी भगवान राम और विष्णु के समान ही शक्तिशाली माना जाता हैं। भगवान विष्णु के 6वें अवतार के रूप में परशुराम पृथ्वी पर अवतरित हुए थे।

 

  • रामभद्र राम से कैसे बने परशुराम :

परशुराम के जन्म का नाम राम माना जाता है तो कुछ लोग रामभद्र मानते हैं। इन्हें भार्गव, भृगुपति, जमदग्न्य, भृगुवंशी आदि नामों से भी जाना जाता है। मान्यता है कि दुनिया से पापों को खत्म करने के लिए इन्होंने भगवान शिव की कड़ी तपस्या की और उनसे युद्ध कला में निपुणता का वरदान पाया। इन्हें कई अद्वितीय शस्त्र भी प्राप्त हुए और इन्हीं में से एक था भगवान शिव का परशु जिसे फरसा या कुल्हाड़ी भी कहते हैं। यह इन्हें बहुत प्रिय था व इसे हमेशा साथ रखते थे। परशु धारण करने के कारण ही इन्हें परशुराम कहा गया।

  • जानिए परशुराम जयंती के बारे में:

परशुराम जयंती वैशाख मास की शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है। इस पावन दिन को अक्षय तृतीया कहा जाता है क्योंकि इस दिन का पुण्य कभी अक्षय यानि कभी भी कम नहीं होता, कभी समाप्त नहीं होता। अक्षय तृतीया के दिन जन्म लेने के कारण ही भगवान परशुराम की शक्ति भी अक्षय थी। मान्यता है कि पराक्रम के प्रतीक भगवान परशुराम का जन्म 6 उच्च ग्रहों के योग में हुआ, इसलिए वह तेजस्वी, ओजस्वी और वर्चस्वी महापुरुष बने।

  • तोड़ दिया था भगवान गणेश का दांत –

हिन्दू मान्यतायों के अनुसार एक बार परशुराम भगवान शिव के दर्शन करने के लिए कैलाश पर्वत गए थे लेकिन इस समय शिव जी गहरी तपस्या में लीन थे इसीलिए भगवान गणेश ने उन्हें मिलने से इनकार कर दिया। इस बात पर परशुराम को क्रोध आ गया और उन्होंने अपने फरसे से भगवान गणेस का एक दांत तोड़ दिया था। इस वजह से भगवान गणेश एकदंत भी कहा जाता है।

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