भाई दूज : क्या है यमराज और यमुना की अनोखी कहानी..?

भाई दूज, भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का प्रतीक माना जाता है. इसे यम द्वितीय और भईया दूज भी कहते है. इस प्रमुख त्यौहार को कार्तिक माह की शुक्ल द्वितीय को भी मनाया जाता है.

भाई दूज के पर्व के पीछे एक बहुत ही सुन्दर कहानी विख्यात है. छाया, सूर्य देव की पत्नी, की दो संतान हुई – यमराज और यमुना.यमुना अपने भाई यमराज से बहुत प्यार करती थी. वह उनसे सदा यह निवेदन करती थी की वह उनके घर आकर भोजन करें. लेकिन यमराज हमेशा व्यस्त रहते थे इसीलिए जा नहीं पाते थे.

एक दिन कार्तिक शुक्ल द्वितीय को यमुना ने अपने भाई को भोजन के लिए बुलाया और यमराज ने उन्हें वचन दिया की वह जरूर आएंगे. रस्ते में यमराज ने नरक में रहने वाले सभी जीवों को मुक्त कर दिया. भाई को देखकर यमुना बहुत खुश होगी और उनका बहुत ही प्रेम के साथ स्वागत सत्कार किया. उन्होंने प्यार से अपने भाई को भोजन परोसा.

अपनी बहन से प्रसन्न होकर उन्होंने अपनी बहन को कुछ मांगने को कहा. यमुना ने कहा – आप हर साल इसी दिन मेरे घर आओगे और जो भी बहन इस दिन अपने भाई का इसी तरह से सत्कार करेगी, उसे मृत्यु का भय नहीं रहेगा.

यमराज ने यमुना की बात मानी और तथास्तु बोलकर यमलोक चले गए. तभी से यह मान्यता है की कार्तिक शुल्क द्वितीय को जो भाई अपनी बहन आतिथ्य स्वीकार करते है उन्हें यमराज का भय नहीं रहता.

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