षटतिला एकादशी : तिल का दान करेगा जीवन से सभी पाप ख़त्म..!

हिन्दू धर्म में एकादशी का बहुत ही ज्यादा माना गया हैं। यह दिन भगवान विष्णु की उपासना का बहुत ही खास दिन माना गया हैं। सभी भक्त इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और एक समृद्ध जीवन के लिए उनका आशीर्वाद लेते हैं। इनमे से सबसे महत्वपूर्ण एकादशी होती हैं “शत्तिला एकादशी”। इस एकादशी का व्रत जीवन में पाप के विनाश, एवं पुण्य की प्राप्ति के लिए होता है। इस एकादशी का व्रत करने से जातक को नर्क से छुटकारा मिलता है तथा स्वर्ग की प्राप्ति होती है।अपने नाम के अनुसार इस एकादशी में छः प्रकार से तिल का उपयोग करना श्रेष्ठ बताया गया है।

क्या करना चाहिए:

  • षटतिला एकादशी का व्रत रखने के लिए प्रातः सूर्योदय से पहले उठकर नित्यक्रिया के बाद तिल का उबटन लगाकर पानी में तिल मिलाकर स्नान करना चाहिए।

  • इसके बाद भगवान विष्णु जी को तिल का प्रसाद अर्पित करना चाहिए।

  • इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना भी बहुत उत्तम रहता हैं।

  • इस एकादशी के व्रत में तिल का दान करना उत्तम बताया गया है। जल पीने की इच्छा हो तो जल में तिल मिलाकर पिएं।

  • जो लोग व्रत नहीं कर सकते हैं उनके लिए जितना संभव हो तिल का इस्तेमाल करना चाहिए। तिल खाना चाहिए और तिल मिला हुआ पानी पिएं।

  • अगर इतना करना संभव नहीं हो तो सिर्फ तिल का उच्चारण ही करें तो भी पाप कर्मों के अशुभ प्रभाव में कमी आएगी।

  • इस दिन तिल का छः तरीके से इस्तेमाल किया जाता हैं: तिल स्नान, तिल का उबटन, तिल का हवन, तिल का तर्पण, तिल का भोजन और तिलों का ‍दान- ये तिल के 6 प्रकार हैं। इनके प्रयोग के कारण यह षटतिला एकादशी कहलाती है। इस व्रत के करने से जीवन से सभी पाप ख़तम हो जाते हैं।

पाएं विष्णु जी की कृपा, विष्णुपदा मंदिर से करें प्रसाद आर्डर: CLICK HERE

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *