सावन में भूलकर भी ना करें ये 8 काम ।

हिन्दी पंचांग के सभी बारह महीनों में श्रावण मास का विशेष महत्व माना जाता है,सावन का महीना भगवान शिव का महीना होता है क्योंकि इस महीने में भगवान विष्णु पाताल लोक में रहते हैं इसलिए भगवान शिव ही संसार के पालनकर्ता का कार्य करते हैं। यानी सावन के महीने में सृष्टि की सारी शक्तियां भगवान शिव के हाथों में होती है। इसलिए इस महीने में भगवान शिव की पूजा अधिक फलदायी होती है। लेकिन सावन में कुछ सावधानी बरतने की भी जरुरत होती है, शास्त्रों में कुछ ऐसे कार्य बचाए गए हैं, जिन्हें सावन में करने से शिव अप्रसन्न हो जाते हैं।

1) परिवार में कलह से बचें:


विशेष रुप से सावन के महीने में परिवार में कलह और वाद-विवाद से बचना चाहिए। जीवनसाथी के प्रति किसी तरह की कटुता या अपशब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से शिव सहित माता पार्वती भी अप्रसन्न हो जाती है। इसलिए सावन में शिव और पार्वती की आराधना कर उनसे दांम्पत्य जीवन में प्रेम और उसकी सफलता के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।

2) सात्विकता का पालन करें:


सावन सात्विकता का महीना होता है सावन में मांस, मदिरा और मांसाहारी भोजन के सेवन से परहेज करना चाहिए। इस महीने में तमासिक भोजन से परहेज करने से काम, क्रोध जैसी नकारात्मक वृतियों से मनुष्य से दूर रहती है और मन एकाग्र होकर शिव की आराधना में लीन रहता है।

3) देर तक सोने से बचें:


सावन के महीने में देर तक सोने से बचना चाहिए। क्योंकि शास्‍त्रों में कहा गया है कि जो मनुष्य सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करके शिवलिंग पर जल चढ़ाता है उसके जन्म जन्मातंर के पाप नष्ट हो जाते हैं। इसलिए देर तक सोने वाले मनुष्य के हाथ से ये अवसर चला जाता है और वो शिव की कृपा से वंचित रह जाता है।

4) बड़े बुजुर्गों का सम्मान करें:


सावन माह में बुजुर्गों, गुरुओं,माता-पिता और विद्वानों का सम्मान करना चाहिए। भूलकर भी इनका अपमान या कटु वचन नहीं बोलना चाहिए। ऐसा करने वाला मनुष्य भगवान शिव करी कृपा से वंचित रह जाता है।

5) शिव भक्तों का अपमान न करें:


सावन के महीने में भूलकर भी शिव भक्तों का अपमान न करें। क्योंकि सावन का महीना शिव का महीना होता है। इस महीने में शिव भक्तों की सेवा से शिव बेहद प्रसन्न होते हैं।

6) दूध का सेवन है निषिद्ध:


शास्‍त्रों के अनुसार सावन के महीने में दूध का सेवन अच्छा नहीं होता है। यही कारण है कि सावन में भगवान शिव का दूध से अभिषेक किया जाता है। इससे वात संबंधी दोषों से भी बचाव होता है।

7) सांड की सेवा करें:


सांड शिव की सवारी नंदी का प्रतीक है। उसके साथ किसी तरह की हिंसा का प्रयोग नहीं करना चाहिए। ऐसा करना शिव की सवारी नंदी का अपमान माना जाता है। सावन में सांड की सेवा से शिव बेहद प्रसन्न होते हैं।

8) सावन में साग खाना है वर्जित:


शास्त्रों में सावन के महीने में साग का सेवन वर्जित माना गया है। क्योंकि इस समय साग में वात बढ़ाने वाले तत्व की मात्रा बढ़ जाती है। इसलिए साग गुणकारी नहीं रह जाता है। इसलिए इसके सेवन से सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

 

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