जानिए अनोखे “छठ पर्व” के बारे में विशेष मान्यताएं..!

यूँ तो उत्तरभारत में महीनेदो महीने पर कई त्यौहार मनाये जाते हैं  मग़र भोजपुरी इलाक़ों, ख़ासकर बिहारझारखंड तथा पूर्वी उत्तरप्रदेश व् नेपाल के कुछ हिस्सों में मनाये जाने वाले छठ पर्व का इंतज़ार लोगों को साल भर रहता है  हालांकि चैत्र नवरात्र तथा शारदीय नवरात्र की तरह छठ पर्व भी साल में दो बार मनाये जाने का प्रावधान है किन्तु दीपावली के बाद यानि कार्तिकी छठ का विशेष ज़ोर होता है और इसी को लोग धूमधाम से मनाते हैं जिन क्षेत्रों में छठ मनाया जाता है, उन क्षेत्रों में अगर आप जाएँ तो आप को अपार उत्साह और हर्षोल्लास का माहौल दिखाई देगा 

सूर्य देवता और छठी मईया की पूजा से जुड़े इस पर्व को मनाये जाने को लेकर कई मान्यताएं हैं कहा जाता है कि छठ की पहली पूजा सूर्यपुत्र कर्ण ने की थी , और तभी से ही ये पर्व मनाया जाता है जबकि एक किंवदंती ये भी है कि जुएं में अपना राजपाट हार चुके पांडवों को सारा राजपाट द्रौपदी के छठ व्रत के बाद वापिस मिल गया था  

ये पर्व, अमूमनदीपावली के बाद चौथे दिन से शुरू होकर 7 वें दिन तक चलता है मसलन 2018 में 7 नवम्बर को मनी दीपावली के बाद छठ पर्व 11 नवम्बर से शुरू होकर 14 नवम्बर तक रहा चार दिन तक मनाया जाने वाला ये त्यौहार नहायखायखरना/लोहंडासांध्य अर्ध्य व् सूर्योदय अर्ध्य में विभाजित है इस व्रत को बड़ा कठिन माना जाता है इस व्रत में स्त्रियों की भूमिका अग्रणी होती है मग़र पुरुषों का योगदान भी अविस्मरणीय होता है छठ के इस व्रत में किसी तरह के धार्मिकक्रियाकलापों को पूर्ण करने में बड़ी सावधानी बरती जाती है ताकि किसी तरह की कोई चूक हो इस पर्व में चूल्हे पर बनने वाला प्रसाद मुख्यतः मिट्टी के बर्तनों में ही पकाये जाने का विधान है हालांकि आधुनिक समयकाल के हिसाब से लोग अन्य बर्तनों में भी इसे पकाने लगे हैं छठ पर्व पर सबसे ज़्यादा लोकप्रियता लोकगीतों की होती है इन्हीं लोकगीतों के ज़रिये लोग छठपर्व के प्रति अपनी आस्था और श्रद्धा को व्यक्त करते हैं

गन्ना, फलफूल के साथ चौथे दिन, सूर्योदय के वक़्त, पास में स्थित किसी नदी में खड़े होकर बांस के सूप में सूर्य भगवान् को अर्ध्य देने के बाद ही इस पर्व की पूर्णता मानी जाती है छठी मईया और सूर्यदेव की अर्चना वाले इस पर्व के ज़रिये सुखशान्तिसमृद्धि, संपन्नता, मानसम्मान, दीर्घ आयु की कामना भी की जाती है  कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति सूर्यदेव और उनकी बहन छठी मईया की पूजाअर्चना विधिविधान से करता है, उसके व् उसके परिवार की रक्षा छठी मईया और सूर्यदेव स्वयं करते हैं यक़ीनन, श्रद्धाविश्वासआस्था का संगम है छठ का ये अनूठा पर्व

 

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