श्रावण में 16 सोमवार व्रत की क्या हैं विशेषता?

कोई भी व्रत प्रारम्भ करने से पहले उसके प्रारम्भ मास, पक्ष, तिथि तथा विधि का ज्ञान अवश्य होना चाहिए। सोमवारी व्रत का प्रारम्भ श्रावण, चैत्र, वैशाख, कार्तिक या मार्गशीर्ष के महीनो के शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार से ही करना चाहिए। इस व्रत को 5 वर्ष अथवा सोलह सोमवार तक पूरी निष्ठा के साथ करना चाहिए। चैत्र,शुक्लाष्टमी तिथि, आर्द्रा नक्षत्र, सोमवार को अथवा श्रावण मास के प्रथम सोमवार को प्रारम्भ करने का विशेष महत्व है।

16 सोमवार व्रत विधि:

व्रत करने वाले स्त्री-पुरुष को चाहिए कि प्रातः काल जल में कुछ काला तिल डालकर स्नान करें तत्पश्चात पूजा घर में जाकर पूरी विधि के साथ पूजा अर्चना करें। पूजा में निम्न वस्तुओं का प्रयोग करनी चाहिए जैसे- श्वेत फूल, सफेद चन्दन, चावल, पंचामृत, अक्षत, पान, सुपारी, फल, गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा-फल-फूलसे शिव-पार्वती तथा साथ में गणेशजी, कार्तिकेय और नंदी जी की भी पूजा-अर्चना करनी चाहिए। पूजा में ऊं नम: शिवाय, गणेश मंत्र ऊं गं गणपतये नम : और चन्द्रमा के बीज मन्त्र ऊं श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम : मंत्रों की कम से कम तीन माला का जप अवश्य करनी चाहिए। ये व्रत स्त्री-पुरुष दोनों एक साथ करते है तो सर्वोत्तम होता है। सोमवार व्रत पूजन काल सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक कभी भी कर सकते है लेकिन सूर्योदय में पूजन करना श्रेष्ठ होता है।

सोमवार व्रत करने वाले के उपवास रखना चाहिए। उपवास अति श्रेष्ठकर माना गया है, यदि कोई व्यक्ति पूर्ण उपवास नहीं कर सकता तो सूर्यास्त के बाद भगवान शिव की पूजा-अर्चना करके, ब्राह्मण को दान-दक्षिणा देकर ही एक समय बिना नमक के भोजन कर सकता है.

सोमवार व्रत का उद्दयापन:

सोमवार व्रत का उद्दयापन उसी महीने में करना अच्छा होता है,जिस मास में व्रत प्रारम्भ किया है ।उद्दयापन में दशमांश जप का हवन करके सफेद वस्तुओं जैसे चावल, श्वेत वस्त्र, दूध-दही,बर्फी चांदी तथा फलों का दान करना चाहिए।

16 सोमवार व्रत से लाभ:

सोमवार व्रत की महिमा अनंत है। शिव भक्तों की शीघ्र मनोकामना पूरी करने के लिए प्रसिद्ध हैं । इसलिए जो कोई भी श्रद्धा भाव से महादेव की आराधना करता है महादेव उसकी मनोकामना अवश्य पूरी करते हैं । इस व्रत को करने से पारिवारिक और मानसिक शांति तो मिलती ही है। साथ ही साथ सभी प्रकार की इच्छाओं की पूर्ति भी होती है ।

16 सोमवार व्रत से मिलेगा मनचाहा जीवनसाथी:

– यदि पति-पत्नी के संबंधों में खटास रहती हो रोजाना वाद-विवाद रहता हो तो इस व्रत को करने से हर तरह के विवाद खत्म हो जाते हैं और संबंधों में मधुरता आ जाती है

– यदि बार-बार प्रयास के बावजूद कार्यो में बाधाएं उत्पन्न हो रही हो तो सोमवार का व्रत तथा पारद शिवलिंग का अभिषेक करने से सभी तरह की बाधाएं खत्म हो जाती है और कार्य शीघ्र ही बन जाता है।

– सोमवार का व्रत तथा शिवलिंग को विधि पूर्वक स्नान कराकर उस स्थान से जल का तीन बार आचमन करने से शारीरिक, वाचिक तथा मानसिक तीनों प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं।

– इस व्रत को करने से मनुष्य के क्रोध, वासना और अहंकार रुपी दुर्गुण नष्ट हो जाते हैं और उसका मन पूर्ण सात्विक कार्यों में लगने लगता है।

– 16 सोमवार व्रत करने वाले मनुष्य की संतान को जीवन के हर क्षेत्र में सफलता की प्राप्ति होती है।

– 16 सोमवार व्रत मनुष्य की मानसिक एकाग्रता बढ़ाने में सहायक होता है । जिससे मनुष्य का मन शिव भक्ति, जप और ध्यान में लगने लगता है।

 

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