शिव से जुड़ी 7 प्रमुख चीजों की कहानी 

कहते हैं, जटाधारी शिवशंकर बहुत भोले हैं इसलिए वह अपने सभी भक्तों की पुकार सुन लेते हैं लेकिन क्या आप यह जानते हैं की महादेव को जिस रुप में हम देखते हैं वह रुप उन्हें कैसे प्राप्त हुआ? भगवान शिव का ध्यान करने मात्र से ही मन में जो एक छवि उभरती है, वह छवि एक वैरागी की होती है जिनके एक हाथ में त्रिशूल ,दूसरे हाथ में डमरु, गले में सांपो माला, सिर पर त्रिपुंड का चंदन, माथे पर अर्धचन्द्र और सिर पर जटाजूट जिससे गंगा की धारा बह रही है। साथ ही साथ बगल में वाहन नंदी खड़े नजर आते हैं। यह वह सात चीजें हैं जो भगवान शिव से जुड़ी हुई हैं। दुनिया में कहीं भी चले जाइये आपको शिवालय में शिव के साथ ये सात चीजें जरुर दिखेंगी।

आइए जानते हैं इन 7 चीज़ों कि मान्यता:

1) चंद्र शिव के मस्तक पर विराजमान चंद्र की बहुत मान्यता हैं। शिव पुराण के अनुसार चन्द्रमा का विवाह दक्ष प्रजापति की 27 कन्याओं से हुआ था जिन्हें  27 नक्षत्र भी माना गया है। इनमें चन्द्रमा रोह‌णी से विशेष स्नेह करते थे। इसकी शिकायत जब अन्य कन्याओं ने दक्ष से की तो दक्ष ने चन्द्रमा को क्षय होने का श्राप दे दिया और इस श्राप से बचने के लिए उन्होंने भगवान शिव की तपस्या की। तपस्या से प्रसन्न होकर शिव जी ने चन्द्रमा के प्राण बचाए और उन्हें अपने शीश पर स्‍थान दिया।

Chandra

 

2) धनुष  ऐसा माना जाता हैं की धनुष का अविष्कार तो भोलेनाथ ने खुद किया था इसलिए शिव को संसार का सबसे बडा धनुर्धारी कहा गया है। महाभारत में और महाकवि कालिदास की रचना किरातअर्जुनियम में शिव के इस धनुर्धारी रूप की चर्चा की गई है।

 

3) त्रिशूल सनातन मान्यता है कि सृष्टि के आरंभ में जब शिव ब्रह्मनाद से प्रकट हुए तो, उनके साथ ही रज, तम और सत नाम के तीन गुण भी प्रकट हुए। यही तीनों गुण शिव जी के शूल यानि,  त्रिशूल बने। लिहाजा, सृष्टि में सामंजस्य बनाए रखने के लिए उन्होंने त्रिशूल रूप में इन तीनों गुणों को अपने हाथों में धारण किया।

 

4) डमरू शिवशंभू के हाथ में डमरू आने की कहानी भी बड़ी ही रोचक है। सनातन मान्यताओं के मुताबिक जब सृष्टि के आरंभ में देवी सरस्वती प्रकट हुईं तब देवी ने अपनी वीणा के स्वर से सृष्टि में ध्वनि को जन्म दिया था और भगवान शिव ने उस समय नृत्य करते हुए चौदह बार डमरू बजाए। इस ध्वनि से व्याकरण और संगीत के छंद, और ताल का जन्म हुआ। डमरू को ब्रह्म का स्वरूप माना जाता है जिसे महादेव अपने साथ लेकर प्रकट हुए थे।

 

5) नाग शिव के गले में एक नाग हमेशा लिपटा होता है जिसे हम वासुकी भी कहते हैं। शिव पुराण में बताया गया है कि, नागलोक के राजा शिव के परम भक्त थे और सागर मंथन के समय उन्होंने रस्सी का काम किया था, जिससे सागर को मथा गया था। इनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिव ने अपने गले में आभूषण की तरह लिपटे रहने का वरदान दिया।

 

6) नंदी नंदी के बारे में मान्यता है कि नंदी और शिव एक ही हैं क्योंकि महादेव ने  नंदी के रुप में भी जन्म लिया था और शिव जी की तपस्या से नंदी शिव गणों में प्रमुख हुए। जिससे उन्हें शिव का वाहन बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था।

 

7) गंगा भगीरथ के तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने भगीरथ को वरदान देते हुए गंगा को स्वर्ग से धरती पर आने के लिए कहा लेकिन गंगा के वेग से पृथ्वी की रक्षा के लिए शिव जी को उन्हें अपनी जटाओं में बांधना पड़ा। मान्यता ये भी हैं कि गंगा, भगवान शिव के करीब ही रहना चाहती थी इसलिए धरती पर उतरने से पहले उन्होंने प्रचंड रूप धारण कर लिया। तब शिव ने पृथ्वी की रक्षा के लिए गंगा को अपनी जटाओं में स्‍थान दिया।

 

App: https://houseofgod.onelink.me/xj4X/HouseOfGodSocial

Web: https://goo.gl/b58FFt

Facebook: http://bit.ly/2wF5wRq

Instagram: http://bit.ly/2wN8X7W

Twitter: http://bit.ly/2w4S5IS

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *