जानिए रुद्राभिषेक का सर्वाधिक महत्त्व?

रुद्राभिषेक का अर्थ है भगवान रुद्र का अभिषेक अर्थात शिवलिंग पर रुद्र के मंत्रों के द्वाराअभिषेक करना। अभिषेक शब्द का शाब्दिक अर्थ है – स्नान करना या कराना। यह पवित्र स्नान रुद्ररूप शिव को कराया जाता है। अभिषेक के कई रूप तथा प्रकार होते हैं। शिव जी को प्रसन्न करने का सबसे श्रेष्ठ तरीका है रुद्राभिषेक करना अथवा श्रेष्ठ विद्वानों के द्वारा कराना। वैसे भी अपनी जटा में गंगा को धारण करने से भगवान शिव को जल धारा प्रिय माना गया है।

 

रुद्राभिषेक क्यों किया जाता हैं?

रुद्राष्टाध्यायी के अनुसार शिव ही रूद्र हैं और रुद्र ही शिव है। रुतम्दु:खम्, द्रावयति नाशयतीति रुद्र: अर्थात रूद्र रूप में प्रतिष्ठित शिव हमारे सभी दु:खों को शीघ्र ही समाप्त कर देते हैं। वस्तुतः जो दुःख हम भोगते है उसका कारण हमारे द्वारा किए गए पापकर्म ही हैं।

इसलिए अपने पापकर्मों और दुखों से छुटकारा पाना के लिए रुद्राभिषेक का विधान है। रुद्राभिषेक करना शिव आराधना का सर्वश्रेष्ठ तरीका माना गया है। रुद्राभिषेक मंत्रों का वर्णन ऋग्वेद, यजुर्वेद औरसामवेद में भी किया गया है। रुद्रार्चन और रुद्राभिषेक से हमारी कुंडली से पातक कर्म एवं महापातक भी जलकर भस्म हो जाते हैं और साधक में शिवत्व का उदय होता है तथा भगवान शिव का शुभाशीर्वाद भक्त को प्राप्त होता है, और उनके सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। ऐसा कहा जाता है कि एकमात्र सदाशिव रुद्र के पूजन से सभी देवताओं की पूजा स्वत: हो जाती है। रुद्रहृदयोपनिषद में शिव के बारे में कहा गया है कि सर्वदेवात्म को रुद्र: सर्वे देवा: शिवात्म का अर्थात सभी देवताओं की आत्मा में रुद्र उपस्थित हैं और सभी देवता रुद्र की आत्मा हैं। हमारे शास्त्रों में विविध कामनाओं की पूर्ति के लिए रुद्राभिषेक के पूजन के निमित्त अनेक द्रव्यों तथा पूजन सामग्री को बताया गया है। साधक रुद्राभिषेक पूजन विभिन्न विधि से तथा विविध मनोरथ को लेकर करते हैं। किसी खास मनोरथ की पूर्ति के लिए तदनुसार पूजन सामग्री तथा विधि से रुद्राभिषेक किया जाता है।

रुद्राभिषेक का आरम्भ कैसे हुआ?

प्रचलित कथा के अनुसार भगवान विष्णु की नाभि से उत्पन्न कमल से ब्रह्मा जी की उत्पत्तिहुई। ब्रह्माजी जबअपने जन्म का कारण जानने के लिए भगवान विष्णु के पास पहुंचे तो उन्होंनेब्रह्मा की उत्पत्ति का रहस्य बताया और यह भी कहा कि मेरे कारण ही आपकी उत्पत्ति हुई है।परन्तु ब्रह्माजी यह मानने के लिए तैयार नहीं हुए और दोनों में भयंकर युद्ध हुआ। इस युद्धसे नाराज भगवान रुद्र लिंग रूप में प्रकट हुए। इस लिंग का आदि अन्त जब ब्रह्माऔर विष्णुको कहीं पता नहीं चला तो हार मान लिया और लिंग का अभिषेक किया, जिससे भगवान प्रसन्नहुए। कहा जाता है कि यहीं से रुद्राभिषेक का आरम्भ हुआ।

रुद्राभिषेक का महत्व:

एक कथा के मुताबिक एक बार भगवान शिव सपरिवार वृषभ पर बैठकर विहार कर रहे थे। उसीसमय माता पार्वती ने मृत्युलोक में रुद्राभिषेक कर्म में प्रवृत्त लोगों को देखा तो भगवान शिव सेजिज्ञासावश पूछा कि हे नाथ! मृत्युलोक में इस इस तरह आपकी पूजा क्यों की जाती है? तथाइसका फल क्या है? भगवान शिव ने कहा- हे प्रिये! जो मनुष्य शीघ्र ही अपनी कामना पूर्ण करनाचाहता है वह मेरा विविध द्रव्यों से विविध फल की प्राप्ति हेतु अभिषेक करता है। जो मनुष्य शुक्ल यजुर्वेदीय रुद्राष्टाध्यायी से अभिषेक करता है उसे मैं प्रसन्न होकर शीघ्र मनोवांछित फलप्रदान करता हूँ। जो व्यक्ति जिस कामना की पूर्ति के लिए रुद्राभिषेक करता है वह उसी प्रकार के द्रव्यों का प्रयोग करता है

रुद्राभिषेक की विधि:

रुद्राष्टाध्यायी के एकादशिनि रुद्री का ग्यारह आवृति पाठ किया जाता है। इसे ही लघु रुद्र कहाजाता है। यह पंचामृत से की जाने वाली पूजा है। इस पूजा को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।प्रभावशाली मंत्रो और शास्त्रोक्त विधि से विद्वानों द्वारा पूजा को संपन्न करवाया जाता है। इस पूजा से जीवन में आने वाले संकटो और नकारात्मक ऊर्जा से छुटकारा मिलता है।

 

रुद्राभिषेक से होने वाले लाभ:

शिव पुराण में अलग-अलग उद्देश्य की पूर्ति लिए हेतु अलग-अलग द्रव्य से रुद्राभिषेक कराने काउल्लेख मिलता है जिसकी विस्तृत जानकारी यहां दी जा रही है

– यदि वर्षा चाहते हैं तो जल से रुद्राभिषेक करें।
– रोग और दुःख से छुटकारा चाहते हैं तो कुशा जल से अभिषेक करना चाहिए।
– मकान, वाहन या पशु आदि की इच्छा है तो दही से अभिषेक करें।
– लक्ष्मी प्राप्ति और कर्ज से छुटकारा पाने के लिए गन्ने के रस से अभिषेक करें।
– धन में वृद्धि के लिए जल में शहद डालकर अभिषेक करें।
– मोक्ष की प्राप्ति के लिए तीर्थ से लाये गये जल से अभिषेक करें।
– बीमारी को नष्ट करने के लिए जल में इत्र मिला कर अभिषेक करें।
– पुत्र प्राप्ति, रोग शांति तथा मनोकामनाएं पूर्ण करने के लिए गाय के दुध से अभिषेक करें।
– ज्वर ठीक करने के लिए गंगाजल से अभिषेक करें।
– सद्बुद्धि और ज्ञानवर्धन के लिए दुग्ध में चीनी मिलाकर अभिषेक करें।
– वंश वृद्धि के लिए घी से अभिषेक करना चाहिए।
– शत्रु नाश के लिए सरसों के तेल से अभिषेक करें।
– पापों से मुक्ति चाहते हैं तो शुद्ध शहद से रुद्राभिषेक करना चाहिए

 

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