आखिर भगवान शंकर क्यों पीते थे भांग..?

भगवन शंकर के भांग पीने का कारण..

भांग को शिव जी का प्रसाद माना गया है और यही कारण है कि भक्त, शिव भक्ति में लीन होकर इसका सेवन जरूर करते है. यहाँ बहुत ही रोचक सवाल उठता है की भगवान शंकर इस प्रकार के नशीले पदार्थों का सेवन क्यों करते थे? दरअसल इसके पीछे पौराणिक कथा छिपी है।

जब समुन्द्र मंथन के दौरान, जब दानव और दैत्य मिलकर अमृत पाने की चाह में समुद्र मंथन कर रहे थे, तब अमृत के साथ-साथ विष भी निकल रहा था। पवित्र अमृत तो विष्णु जी स्त्री का रूप धारण कर ले गए और पीछे बच गया बहुत सारा विष। वह विष बहुत ही घातक था और उसकी एक भी बूंद  सृष्टि के लिए विनाशकारी साबित हो सकती थी। इस विष को कोन धारण करता ?

इसीलिए सभी देवताओं ने भगवान शिव से अनुरोध किया कि वह इस विष को धारण करें, क्योंकि भगवान शिव ही उस विष के प्रकोप को सहन करने में सक्षम थे। सभी देवताओं के अनुरोध पर और संसार के कल्याण के लिए, भगवान शिव ने उस विष को धारण किया। विष पीने से उनकी स्थिति बिगड़ने लगी और वह अचेत होने लगे तब उसके प्रभाव को शांत करने के लिए भगवान शिव को भांग, ढूध और जल अर्पित किया गया।

भगवान शिव को भांग-धतूरा चढ़ाने की परंपरा, उनके पूजन व अभिषेक का एक हिस्सा बन गई। पर दूरसे अर्थो में भांग व धतूरा नशीले पदार्थ हैं। यहाँ देखा जाये तो भगवान शिव को भांग-धतूरा चढ़ाने का अर्थ है, अपनी बुराइयों को भगवान को समर्पित करना या कहे, की अपनी बुराइयों को त्यागना ही भगवान शिव कि सच्ची आराधना है।

 

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