आखिर क्यों सोमनाथ कहलाता है अनादितीर्थ?

बारह ज्योतिर्लिंगों में सर्वप्रथम, गुजरात के सौराष्ट्र प्रान्त के प्रभास पाटन क्षेत्र में स्थित ‘सोमनाथ धाम’ शिव का अविनाशी तीर्थ है। सोमनाथ का तात्पर्य होता है ‘सोम’ या ‘चन्द्र का स्वामी’ जो स्वयं शम्बसदाशिव हैं। इसलिए इस धाम को ‘सोमनाथ’ या ‘सोमेश्वर’ कहा जाता है। सोमनाथ का वर्णन वेदों और पुराणों जैसे श्रीमद भागवत, स्कंद्पुराण, शिवपुराण व ऋग्वेद आदि में भी आता है जो इसके एक प्राचीन एवं महत्वपूर्ण स्थल होने का प्रमाण है। मंदिर के विषय में ऐसी किवदंती है कि यहाँ भगवान कृष्ण से सम्बंधित स्यमंतक मणि गर्भगृह में छिपी हुई थी, जो सोना उत्पन्न करती   थी। इसलिए ही सोमनाथ में अकूत खजाना होने के प्रमाण मिलते हैं। यहाँ से कुछ दूर पर बाखला तीर्थ नामक जगह है, जहाँ पर भगवान कृष्ण को पैर में भील का तीर लगा था और वह अपना देह त्याग कर कृष्ण लोक चले गए। सोमनाथ ज्योतिर्लिंग को अन्य नामों जैसे सोमेश्वर, दियो पाटन, प्रभास पाटन, सोमनाथ पाटन  आदि नामों से भी जाना जाता है।

सोमनाथ एक महान तीर्थ की श्रेणी में आता है क्योंकि यह तीन पवित्र नदियों – कपिला, हिरन व सरस्वती का संगम बिंदु है और इसे त्रिवेणी संगम भी कहा जाता है।

एतिहासिक तथ्यों के अनुसार, सोमनाथ मंदिर को मुग़ल आक्रान्ताओं द्वारा अनेकों बार लूटा व नष्ट किया गया, परन्तु हर बार इसका निर्माण उसी जगह किया गया। इसकी अकूत सम्पदा तथा सोने, चांदी की मूर्तियों, रत्नों आदि को महमूद ग़ज़नी ने छह बार लूटा। वर्तमान ढ़ांचे का निर्माण चालुक्या वास्तु शैली में १९४७ से १९५१ के बीच वल्लभभाई पटेल द्वारा किया गया था। तथा इसका उद्घाटन उस समय के राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने किया था। सर्वप्रथममंदिर का निर्माण चन्द्र देव ने सोने में किया था। उसके बाद रावण ने इसका निर्माण चांदी में किया, तत्पश्चात भगवान कृष्ण नेइ इसको चन्दन की लकड़ी से बनाया। बाद में 10 वीं शताब्दी में इसको पत्थर में राजा भीमदेव सोलंकी द्वारा बनाया गया। किन्तु इसकी अखंडता, अलोकिकता व दिव्यता को कोई नुकसान नहीं पहुंचा पाए। इसलिए इस मंदिर को ‘अनादि ईमारत‘ की उपाधि दी गयी है।

सोमनाथ से संबंधित कुछ दिलचस्प व अनकहे तथ्य:

  • ऐसी मान्यता है कि मंदिर के गर्भगृह में स्थित संगमरमर की मूर्ति किसी समय हवा में तैरती थी। बाद में एक राजा और उसके सैनिकों ने पता लगाया कि मूर्ति का छत्र चुंबक का और मूर्ति लोहे की थी और छत्र की चुम्बकीये शक्ति के दबाव के कारण वह हवा में लटकी हुई थी।
  • सोमनाथ मंदिर से जुड़ी एक कहानी के अनुसार, एक बार सोमदेव या चन्द्र को उनके ससुर दक्ष प्रजापति ने कोई बात से कुपित होकर श्राप दे दिया जिससे उनकी आभा या रोशनी धूमिल हो गयी। तब चंद्रदेव ने इसी प्रभास क्षेत्र में शिव की घोर तपस्या व आराधना की तो शिव ने प्रसन्न होकर उन्हें श्राप मुक्त किया और उनकी चमक वापिस कर दी। तब चंद्रदेव ने यहाँ सोमनाथ का सोने का मंदिर बनाया।
  • सोमनाथ मंदिर में गैर-हिन्दुओं का प्रवेश वर्जित है। वह मंदिर प्रशासन से विशेष अनुमति लेकर ही मंदिर में दर्शन कर सकते हैं।
  • एक बार सुल्तान महमूद ने सन १०२५ ईसवीं में भारत में धार्मिक युद्ध छेड़ दिया था और सोमनाथ को तबाह करने की पूरी कोशिश की लेकिन यहाँ के लोगों ने उसका डट कर मुकाबला किया व आखिरी साँस तक युद्ध किया तथा सोमनाथ को बचा लिया।
  • जूनागढ़ से 79 किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर अपनी श्रेष्ठ वास्तु कला के लिए जाना जाता है।
  • वर्तमान मंदिर जो ‘कैलाश महामेरू प्रसादा’ के नाम से भी संबोधित किया जाता है, चालुक्या शिल्पकारी की अद्भुत मिसाल है जो गुजराती शिल्पकारों, सोमपुरस जाति द्वारा निर्मित किया गया है| मंदिर के शिखर की ऊंचाई 155 फीट है तथा मंदिर की चोटी पर 10 टन का कलश स्थापित किया गया है।
  • मंदिर की ख़ास बात है कि यह ऐसी जगह पर स्थित है जहाँ सोमनाथ के तट और अंटार्टिका के मध्य कोई ज़मीन नहीं है और यह मंदिर ऐसे स्थल पर है, जो उत्तर से दक्षिण ध्रुवी दिशा में पड़ने वाला पहला ज़मीनी बिंदु है। यह जानकारी मंदिर की समुद्र ओर वाली दीवार पर स्थापित ‘बाणस्तम्भ पर संस्कृत में अंकित की हुई है।

सोमनाथ के अन्य दर्शनीय धार्मिक स्थल:

सौराष्ट्र, प्रभास क्षेत्र में प्रसिध्द सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के अलावा देखने लायक अन्य धार्मिक स्थलों में लक्ष्मी नारायण मंदिर, परशुराम मंदिर, त्रिवेणी संगम मंदिर, अहिल्याबाई मंदिर, शशिभूषण महादेव व भिडभंजन गणपतिजी मंदिर, गीता मंदिर, सूरज मंदिर, कामनाथ महादेव मंदिर, पंच पांडव गुफा, भाकला तीर्थ जहाँ श्री कृष्ण के पैर में भील का तीर लगा था, द्वापर अंत में और वह अपने निजधाम पधार गए थे, श्री परशुराम मंदिर, रुद्रालय महादेव मंदिर, देहोत्सर्ग व प्राची तीर्थ प्रमुख हैं। इसके अलावा प्रभास पटन संग्रहालय है जहाँ भगवान शिव का काल भैरव लिंग स्थापित है।  साथ ही चन्द्र देव ने इस लिंग की यहाँ पूजा की थी, जूनागढ़ गेट जो यहाँ का एक मुख्य आकर्षण है और ऐसी मान्यता है कि महमूद ग़ज़नी सोमनाथ मंदिर को लूटने और तबाह करने इसी जूनागढ़ गेट के द्वारा ही शहर में आया था तथा इसकी पच्चीकारी अद्वितीय है। त्रिवेणी घाट, सोमनाथ समुद्र तट यहाँ के अन्य दर्शनीय स्थल हैं। सोमनाथ के निकट स्थित दर्शनीय स्थलों में द्वारका (95 किलोमीटर) जो भगवान कृष्ण की कर्मभूमि और मुख्य तीर्थों में है, गिर अभ्यारण(45 किलोमीटर), जूनागढ़ (90 किलोमीटर), दिउ (95 किलोमीटर), दमन, पोरबंदर, गिरनार, भुज  आदि हैं।

सोमनाथ एक अद्भुत, चमत्कारिक और चिरकालिक तीर्थ है जहाँ भगवान शिव, चंद्रदेव व श्री कृष्ण की प्रस्तुति एवं अनुकम्पा होने के कारण यहाँ आने वालों को एक दिव्यता तथा पराशक्ति की महसूसता होती है, जो बरबस ही उन्हें अत्यंत श्रदा व विश्वास से भर देती है।

 

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