दुर्गा सप्तशती के ये मंत्र दिलाएंगे हर समस्या से समाधान..!!

नवरात्रि का हर दिन माँ दुर्गा के स्वरुप को अर्पित होता है। माँ दुर्गा का विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से और पसंदीदा भोग चढ़ाने से मनचाहा फल प्राप्त होता है, तथा रुके हुए कार्य संपूर्ण हो जाते है। हर दिन अत्यंत ही शुभ और कल्याणकारी है। कहा गया है कि पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ नवरात्रि के व्रत रखने से माँ अत्यंत प्रसन्न होती है और उनकी कल्याणकारी दृष्टि साधक पर पड़ती है।

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नवरात्रों में दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से शक्ति, साधना व कृपा प्राप्त होती है। नवरात्रि के दौरान कलश स्थापना के साथ शतचंडी, नवचंडी, दुर्गा सप्तशती और देवी अथर्वशीर्ष का पाठ किया जाता है। दुर्गा सप्तशती के पाठ के कई विधि-विधान है। दुर्गा सप्तशती में श्लोक, अर्धश्लोक और उवाच मिलकर 700 मंत्र है जो कि सारे जगत को अर्थ, काम, धर्म, मोक्ष प्रदान करते हैं। दुर्गा सप्तशती में कुछ ऐसे शक्तिशाली श्लोक और मंत्र है जिनका पाठ करने से माँ की असीम कृपा प्राप्त की जाती है।

इनका विधिवत परायण करने से स्वयं के नाना प्रकार के कार्य व सामूहिक रूप से दूसरों के कार्य पूर्ण होते हैं। इन मंत्रों को नौ दिनों में अवश्य जाप करे। इनसे यश, सुख, समृद्धि, पराक्रम, वैभव, बुद्धि, ज्ञान, सेहत, आयु, विद्या, धन, संपत्ति, ऐश्वर्य सभी की प्राप्ति होती है।

1) दुर्गा मंत्र: जीवन में आये किसी भी तरह की विपत्ति-नाश के लिए

शरणागत-दीनार्त-परित्राण-परायणे।

सर्वस्पापहरे देव‍ि नारायणि नमोस्तुते।।

2) दुर्गा मंत्र: किसी भी तरह के भय नाश के लिए

सर्व स्वरूपे सर्वेश सर्वशक्ति समन्विते।

भयेभ्यस्त्राहि नो देवि, दुर्गे देवि नमोस्तुते।।

3) दुर्गा मंत्र: पाप नाश तथा भक्ति की प्राप्ति के लिए

नमेभ्य: सर्वदा भक्त्या चण्डिके दुरितापहे।

रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।।

4) दुर्गा मंत्र: माँ की असीम कृपा और मोक्ष की प्राप्ति के लिए…

त्वं वैष्णवी शक्तिरन्तवीर्या।

विश्वस्य बीजं परमासि माया।

सम्मोहितं देवि समस्तमेतत्

त्वं वै प्रसन्ना भूवि मुक्तिहेतु:।।

5) दुर्गा मंत्र: सुख, समृधि और हर प्रकार के ‍कल्याण के लिए…

सर्वमंगल्यमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।

शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुते।।

6) दुर्गा मंत्र: बाधा मुक्ति दूर करने तथा योग्य संतान और समृधि प्राप्ति के लिए…

सर्वबाधा विनिर्मुक्तो-धन धान्य सुतान्वित:

मनुष्यों मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय:।।

7) दुर्गा मंत्र: हर तरह के संकट से रक्षा पाने के लिए…

शूलेन पाहि नो देवि पाहि खंडे न चाम्बिके।

घण्टास्वनेन न: पाहि चापज्यानि: स्वनेन च।।

8) दुर्गा मंत्र: जीवन में बाधा व शांति के लिए…

सर्वबाधा प्रमशन: त्रैलोक्याखिलेश्वरि।

एवमेव त्वया कार्यमस्यद्धैरिविनाशनम्।।

9) दुर्गा मंत्र: सुलक्षणा पत्नी की प्राप्ति के लिए…

पत्नी मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्।

तारिणी दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम।।

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