नवरात्रि विशेष: माता के प्रसिद्ध शक्तिपीठ..!

नवरात्रि शुरू होने वाले हैं और इन नौ दिनों ने माँ दुर्गा के सभी स्वरूपों की पूजा अर्चना की तैयारियां भी। नवरात्रि भारत संस्कृति का एक बहुत ही अहम् हिस्सा है, जिसे हर साल बहुत ही हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है। इन दिनों माँ के शक्तिपीत में भी भारी संख्या में भक्तों का आवागमन होता है। यूं तो माँ दुर्गा के 51 शक्तिपीठ है, लेकिन यह 9 शक्तिपीठ सर्वप्रथम माने जातें है।

  1. नैना देवी मंदिर

नैना देवी मंदिर, हिमाचल के बिलासपुर जिले में स्थित, बहुत ही भव्य मंदिर है। यह माँ के 51 शक्तिपीठ में से एक है। मान्यता है कि इस स्थान पर देवी सती के नेत्र गिरे थे। मंदिर के पास ही एक गुफा भी है, जिसे नैना देवी गुफ़ा के नाम से जाना जाता है।

 

 

  1. ज्वाला देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश

ज्वालामुखी मंदिर, कांगडा घाटी से 30 किलोमीटर दक्षिण में हिमाचल प्रदेश में स्थित है। यह मंदिर 51 शक्ति पीठों में शामिल है। ज्वालामुखी मंदिर की गिनती सबसे प्रसिद्ध शक्तिपीठ में से होती है और इसे जोता वाली का मंदिर और नगरकोट भी कहा जाता है। इस स्थाल पर माता सती की जीभ गिरी थी। ऐसी मान्यता है की इस मंदिर में माता के दर्शन ज्योति रूप में होते है।

 

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  1. कामाख्या शक्तिपीठ गुवाहाटी (असम)

कामख्या मंदिर को शक्ति साधना का सबसे बड़ा केंद्र माना गया है और इसकी बहुत मान्यता है। जब भगवान विष्णु ने माता सती के मृत शरीर के 51 भाग किये थे तब यहां पर माता सती का गुह्वा मतलब योनि भाग गिरा था। कामाख्या महापीठ की उत्पत्ति उसी से हुई थी।

 

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  1. अम्‍बाजी मंदिर, गुजरात

अम्बाजी माता मन्दिर, माँ शक्ति के 51 शक्तिपीठों में से एक प्रधान पीठ है। यह गुजरात-राजस्थान सीमा पर अरासुर पर्वत पर स्थित है। यहाँ मां सती का हृदय गिरा था। ऐसी मान्यता है की जो भी भक्त यहाँ के दर्शन करता है, उसके सारे कष्टों का निवारण होता है और समाज में पद-प्रतिष्ठा प्राप्त होती है

 

 

  1. हिंगलाज शक्तिपीठ

माँ सती का यह प्रसिद्ध शक्तिपीठ, पाकिस्तान के बलूचिस्तान राज्य में स्थित है। पास में ही हिंगला नदी प्रवाहित होती है। यहाँ माँ सती का सर का उपरी भाग गिरा था इसीलिए इस स्थान को बहुत ही चमत्कारी माना जाता है। इससे जुड़ी प्रसिद्ध मान्यता यह है की जो यहाँ के दर्शन कर लेता है, उसके पिछले जन्म के सारे पाप दूर हो जातें है.

 

  1. कालीघाटी शक्तिपीठ

कोलकाता में कालीमंदिर के नाम से प्रसिद्ध यह शक्तिपीठ, बहुत ही प्रसिद्ध है। यहाँ माता के दायें पाँव का अंगूठा छोड़, 4 अन्य उंगलिया गिरी थी इसीलिए यह जगह अत्यंत ही पावन तीर्थस्थलों में से एक है यहाँ की शक्ति कलिका तथा भैरव नकुलेश है।

 

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    1. विशालाशी शक्तिपीठ

    यह शक्तिपीठ, वाराणासी के मीरघाट पर स्थित है। यहाँ पर माता सती के दाहिने कान की मणि गिरी थी। इस जगह को ‘मणिकर्णिका घाट’ भी कहते हैं।

     

    1. कात्यायनी शक्तिपीठ

    कात्यायनी शक्तिपीठ, वृन्दावन उत्तर प्रदेश के मथुरा नगर में स्थित है। यहाँ पर माता सती का केशपाश गिरा था। यहाँ की देवी शक्ति कात्यायनी तथा भैरव भूतेश है।

     

    1. किरीट शक्तिपीठ

    माता का यह शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल से 3 किलोमीटर दूर हुगली नदी के लालबाघ कोट पर स्थित है यहाँ पर माता सती का शीराभूषण यानि मुकुट गिरा था। इसे देवी के पहले शक्तिपीठ के नाम से भी जाना जाता है. कहा जाता है की यहाँ श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है।

     

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