जानिए महाकालेश्वर की भस्म आरती का रहस्य :

भगवान शिव को समर्पित, महाकालेश्वर मंदिर, मध्यप्रदेश राज्य के उज्जैन नगर में स्थित है। इस मंदिर की बहुत मान्यता है और पुराणों, महाभारत और कालिदास जैसे महाकवियों की रचनाओं में इस मंदिर का बहुत ही सुन्दर रूप से वर्णन किया गया है।  देश के हर कोने से लोग इस मंदर के दर्शन करने आते है विशेषकर महाकुंभ के दौरान यहां भीड़ बढ़ जाती है।  फाल्गुनकृष्ण पक्ष की पंचमी से लेकर महाशिवरात्रि तक तथा नवरात्रि महोत्सव पर यहाँ महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का विशेष महत्त्व माना गया है।

प्रकट हुए थे भगवन शिव:

उज्‍जैन में महाकाल के प्रकट होने के व‌िषय में कथा है क‌ि दूषण नाम के असुर से लोगों की रक्षा के ल‌िए महाकाल प्रकट हुए थे। दूषण का वध करने के बाद भक्तों ने जब श‌िव जी से उज्‍जैन में वास करने का अनुरोध क‌िया तब महाकाल ज्योत‌िर्ल‌िंग प्रकट हुआ।

मुख्य आकर्षण :

महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य आकर्षणों में भगवान महाकाल की भस्म आरती, नागचंद्रेश्वर मंदिर, भगवान महाकाल की शाही सवारी आदि है। प्रतिदिन अलसुबह होने वाली भगवान की भस्म आरती के लिए कई महीनों पहले से ही बुकिंग होती है। कहा जाता है कि यदि आपने महाकाल की भस्म आरती नहीं देखी तो आपका महाकालेश्वर दर्शन अधूरा है।

महाकाल की भस्म आरती:

शिव पूजन में भस्म अर्पित करने का विशेष महत्व है। भस्म की आरती यहाँ की प्राचीन परंपरा है और पुरे विश्व में सिर्फ उज्जैन के महाकाल मंदिर में ही प्रतिदिन विशेष रूप से की जाती है।  शिवपुराण के अनुसार भस्म सृष्टि का सार है और एक दिन संपूर्ण सृष्टि इसी राख में परिवर्तित हो जानी है। इसीलिए इस सृष्टि के सार भस्म को शिवजी सदैव धारण किए रहते हैं।

भस्म तैयार करने के लिए कपिला गाय के गोबर से बने कंडे, शमी, पीपल, पलाश, बड़, अमलतास और बेर के वृक्ष की लकडिय़ों को एक साथ जलाकर तैयार किये गए भस्म का प्रयोग किया जाता है। इस दौरान उचित मंत्रोच्चार किए जाते हैं और जो भस्म प्राप्त होती है, उसे कपड़े से छान लिया जाता है। इसी भस्म से प्रतिदिन महाकाल की आरती होती है।

क्यों होती है महाकाल की भस्म आरती:

भस्‍म आरती महाकाल का श्रृंगार है और उन्हें जगाने की व‌िध‌ि माना गया है, जो प्रतिदिन सुबह 4 बजे किया जाता है। ऐसी मान्यता है क‌ि वर्षों पहले श्मशान के भस्‍म से भगवान महाकाल की भस्‍म आरती होती थी लेक‌िन अब यह परंपरा खत्म हो चुकी है।  वर्तमान में कंडे के बने भस्‍म से आरती श्रृंगार क‌िया जाता है।

इस आरती को मह‌िलाएं नहीं देख सकती हैं इसल‌िए आरती के दौरान कुछ समय के ल‌िए मह‌िलाओं को घूंघट करना पड़ता है। भस्‍म का व‌िशेष महत्व है और यही इनका सबसे प्रमुख प्रसाद है। श‌िव के ऊपर चढ़े हुए भस्‍म का प्रसाद ग्रहण करने से कई रोगों से मुक्त‌ि म‌िलती है।

जिस प्रकार भस्म से कई प्रकार की वस्तुएं शुद्ध हो जाती हैं, शिवजी को अर्पित की गई भस्म का तिलक लगाने से पुण्य की प्राप्ति होती है और कई जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है। इसकी एक विशेषता यह भी है कि यह शरीर के रोम छिद्रों को बंद कर देती है जिससे गर्मी में गर्मी और सर्दी में सर्दी नहीं लगती। अर्थात भगवान शिव संदेश देते हैं कि परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढाल लेना चाहिए।

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