शिव निवास स्थान “ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग” की अद्भुत कहानी

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश में इंदौर के समीप स्थित है। इस ज्योतिर्लिंग के  पास नर्मदा नदी बहती है और पहाड़ी के चारों ओर नदी बहने से यहां ऊं का आकार बनता है। यह ज्योतिर्लिंग औंकार अर्थात ऊं का आकार लिए हुए है, इस कारण इसे ओंकारेश्वर नाम से जाना जाता है।

स्वयं प्रकट हुआ यह ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग के चारों  ओर हमेशा जल भरा रहता है। इस ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दो स्वरुप है और एक को ममलेश्वर के नाम सेजाना जाता है। इन दोनों की गणना एक में ही की जाती है। कहते है इन दोनों के दर्शन करने से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते है, उनकी असीम कृपा प्राप्त होती है और मन की साड़ी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है।

क्या है मान्यता :

विंध्यपर्वत ने एक बार शिवलिंग तैयार करके, छः महीने तक उसकी घोर तपस्या की थी। उनकी उपासना से प्रसन्न होकर प्रभु ने उन्हें दर्शन दिए थे| अनेकों ऋिषगण, योगियों और मुनि भी शंकर के दर्शन के लिए एकत्रित हुए और उनसे अनुरोध किया की इस शिवलिंग के द्वारा सबको आपका अश्रीर्वाद मिलता रहना चाहिए| उन्होंने उनसे प्राथना की आप हमेशा के लिए यहाँ स्थिर होकर यहाँ निवास करें। भगवान शंकर ने उनकी विनती को प्रसन्नचित मन से स्वीकार किया और उस शिवलिंग के दो भाग कर दिए, एक ओम्कारेश्वर और दूसरा ममलेश्वर के नाम से जाना गया|

शिवपुराण में वर्णन किया गया है की नर्मदा करने और माँ नर्मदा की घी के दिए से पूजन करने के बाद इन ज्योतिर्लिंग का दर्शन करना अत्यंत सुख और मोक्ष प्रदान करने वाला है।

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