जानिए शिव ज्योतिर्लिंगों के अद्भुत रहस्य और उनकी मान्यता

1- सोमनाथ

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग, गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित, यह मंदिर इस पृथ्वी का पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। ऋग्वेद में इसका वर्णन मिलता है और कहा जाता है की स्वयं चंद्रदेव ने इस शिवलिंग की स्थापना की थी। शिवपुराण के अनुसार जब चंद्रमा को दक्ष प्रजापति ने क्षय रोग होने का श्राप दिया था, तब चंद्रमा ने इसी स्थान पर तप कर इस श्राप से मुक्ति पाई थी। यह 17 बार नष्ट हो चुका है और हर बार इसका पुनर्निर्माण होता आ रहा है।

2- मल्लिकार्जुन

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आन्ध्र प्रदेश में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल नाम के पर्वत पर स्थित है। इस मंदिर की महत्वता को भगवान शिव के कैलाश पर्वत जैसा ही माना जाता है। मान्यता है की इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।

3- महाकालेश्वर

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, मध्य प्रदेश की उज्जैन नगरी में स्थित है। इस मंदिर की विशेषता है कि ये एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। यहां प्रतिदिन सुबह की जाने वाली भस्म आरती विश्व भर में प्रसिद्ध है। महाकालेश्वर की पूजा विशेष रूप से आयु वृद्धि और आयु पर आए हुए संकट को टालने के लिए की जाती है।

4- ओंकारेश्वर

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश में इंदौर के समीप स्थित है। इस ज्योतिर्लिंग के  पास नर्मदा नदी बहती है और पहाड़ी के चारों ओर नदी बहने से यहां ऊं का आकार बनता है। यह ज्योतिर्लिंग औंकार अर्थात ऊं का आकार लिए हुए है, इस कारण इसे ओंकारेश्वर नाम से जाना जाता है।

5- केदारनाथ

यह ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड में स्थित है। स्कन्द पुराण एवं शिव पुराण में केदारनाथ का वर्णन मिलता है। इस स्थान की महत्वता को कैलाश पर्वत की महत्वता के सामान माना गया है।

6- भीमाशंकर

यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पूणे जिले में सह्याद्रि नामक पर्वत पर स्थित है। इसे मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है। जो भक्त श्रृद्धा से इस मंदिर के प्रतिदिन सुबह सूर्य निकलने के बाद दर्शन करता है, उसके सात जन्मों के पाप दूर हो जाते हैं और उसके लिए स्वर्ग के मार्ग खुल जाते हैं।

7- काशी विश्वनाथ

विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग उत्तर प्रदेश के काशी नामक स्थान पर स्थित है। इस स्थान की मान्यता है, कि प्रलय आने पर भी यह स्थान बना रहेगा। इसकी रक्षा के लिए भगवान शिव इस स्थान को अपने त्रिशूल पर धारण कर लेंगे और प्रलय के टल जाने पर काशी को उसके स्थान पर पुन: रख देंगे।

8- त्र्यंबकेश्वर

यह ज्योतिर्लिंग गोदावरी नदी के करीब महाराष्ट्र राज्य के नासिक जिले में स्थित है। इस ज्योतिर्लिंग के पास ब्रह्मागिरि पर्वत स्थित है जहाँ से गोदावरी नदी शुरूहोती है। कहा जाता है कि भगवान शिव को गौतम ऋषि और गोदावरी नदी के आग्रह पर यहां ज्योतिर्लिंग रूप में रहना पड़ा था।

9- वैद्यनाथ

श्री वैद्यनाथ शिवलिंग का समस्त ज्योतिर्लिंगों की गणना में नौवां स्थान बताया गया है। भगवान श्री वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग का मन्दिर जिस स्थान पर अवस्थित है, उसे वैद्यनाथ धाम कहा जाता है। यह स्थान झारखण्ड प्रान्त, पूर्व में बिहार प्रान्त के संथाल परगना के दुमका नामक जनपद में पड़ता है।

10-नागेश्वर ज्योतिर्लिंग

यह ज्योतिर्लिंग गुजरात के बाहरी क्षेत्र में द्वारिका स्थान में स्थित है। भगवान शिव नागों के देवता है और नागेश्वर का अर्थ नागों का ईश्वर है। इस ज्योतिर्लिंग की महिमा में कहा गया है कि जो व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ यहां दर्शनों के लिए आता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

11- रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग

यह ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु राज्य के रामनाथ पुरं नामक स्थान में स्थित है। यह स्थान हिंदुओं के चार धामों में से एक भी है। इस ज्योतिर्लिंग के विषय में यह मान्यता है, कि इसकी स्थापना स्वयं भगवान श्रीराम ने की थी। भगवान राम के द्वारा स्थापित होने के कारण ही इस ज्योतिर्लिंग को भगवान राम का नाम रामेश्वरम दिया गया है।

12-घृष्णेश्वर मन्दिर

घृष्णेश्वर मंदिर महाराष्ट्र के संभाजीनगर के समीप दौलताबाद के पास स्थित है। बौद्ध भिक्षुओं द्वारा निर्मित एलोरा की प्रसिद्ध गुफाएं इस मंदिर के समीप स्थित हैं। यहीं पर श्री एकनाथजी गुरु व श्री जनार्दन महाराज की समाधि भी है।

 

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