उत्पन्ना एकादशी व्रत व पूजा विधि:

उत्पन्ना एकादशी की बहुत ही महत्वता है। एकादशी देवी विष्णु की माया से प्रकट हुई थी। जो व्यक्ति इस दिन उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखता वह विष्णु लोक में स्थान पाने योग्य बन जाता है। साथ ही साथ उसके सभी पापों से उसे मुक्ति मिलती है..! माना जाता है इस दिन व्रत करने से हजारों यज्ञों का फल भी मिलता है।

उत्पन्ना एकादशी व्रत व पूजा विधि:

  • व्रत करने से एक दिन पहले रात्रि में भोजन करने के बाद अच्छे से दातुन कुल्ला कर लेना चाहिए ताकि अन्न का अंश मुंह में ना रहे।

  • कुल्ला करने के बाद रात्रि को बिल्कुल भी भोजन न करें।

  • उत्पन्न एकादशी के दिन प्रात:काल में सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि कार्यों से निवृत होकर सच्चे मन से व्रत का संकल्प करना चाहिए।

  • भगवान विष्णु और देवी एकादशी की पूजा करनी चाहिए और व्रत कथा सुननी चाहिए।

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  • व्रत वाले दिन व्रतधारी को बुरे कर्म करने पापों और व्यर्थ की बातों से बचना चाहिये।

  • रात्रि में भगवान का भजन-कीर्तन करना चाहिए।

  • आप बीच में फलाहार ले सकते है.

  • द्वादशी के दिन प्रात:काल ब्राह्मण या किसी गरीब को भोजन करवाना चाहिए.

  • गरीबों को दान दक्षिणा देकर फिर अपने व्रत को पूरा करना चाहिए।

  • इस विधि से किया गया यह उपवास बहुत ही फलदायी होता है और विष्णु जी की असीम कृपा प्राप्त करवाता है।

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