हाल न पूछो मेरे दिल दा (ओशो सिद्धार्थ)

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osho siddharth aulia

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हाल न पूछो मेरे दिल दा हाल न पूछो मेरे दिल दा, हो गया ओशो का दीवाना। दैर-हरम, गिरजे, गुरुद्वारे, यूं तो सब लगते हैं प्यारे; हम पीने वाले मधु पीकर, गाते हैं ओशो का गाना। नानक, कृष्ण, बुद्ध, तीर्थंकर, यूं तो सब हैं सर-आंखों पर; भाता पीने वालों को, ओशो का अंदाजे-रिंदाना। सुबह उन्हीं से, शाम उन्हीं से, जाना हमने राम उन्हीं से; घट में रब है, रब में सब हैं, पाया हम ने नाम खजाना। वे दीपक हैं, हम परवाने, मस्ती उनकी, हम मस्ताने; ध्यान-प्रेम का कितना सुन्दर, बुना उन्होंने ताना-बाना। -ओशो सिद्धार्थ

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