चलो ध्यान की एक बगिया लगाएं

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चलो ध्यान की एक बगिया लगाएं; चलो प्यार की एक गंगा बहाएं। उखड़ जाएं सूखे शज़र हर चमन से; चलो एक आंधी हम ऐसी उठाएं। न मीरा को कोई राणा जहर दे; न सुकरात को कोई विष अब पिलाए। न जीसस को सूली न ही कत्ले-सरमद; न मंसूर पर कोई पत्थर चलाए। दोबारा न हो हादसा करबला का; चलो कुछ चमत्कार ऐसा दिखाएं। बजे बांसुरी कृष्ण की हर गली में; चलो आज राधा को सर से लगाएं। न सिद्धार्थ भागो यहाँ रह के जागो; जो कहते हैं ओशो उसे कर दिखाएं।

house of god
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