Ganesh Chaturthi Muhurat and Puja Samgri

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आइए जानते हैं गणेश चतुर्थी व उसकी तैयारी के बारे में: *मूर्ति कैसी होनी चाहिए? *गणेश जी कि मूर्ति शुद्ध मिट्टी की, चतुर्भुज और कमल के आसन पर बैठी हुई होनी चाहिए. *सूंड़ - दक्षिणावर्ती यानि - (हमारे देखने से दाहिनी ओर) की तरफ होनी चाहिए. *गणेश जी की मूर्ति की स्थापना घर के ईशान कोण यानि (नार्थ-ईस्ट) या पूर्व में करें। * यानि गणेश जी का मुख पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए । *ध्यान रखे, गणेश जी की पीठ आपके घर की तरफ न हो। *जहां गणेश जी को विराजमान करना है वहां आस-पास सीढ़ी, टॉयलेट, किचन इत्यादि न हों। स्थापना के स्थान पर पहले पीला सूती वस्त्र बिछाएं , हल्दी से रंगे चावलों से स्वस्तिक बनाये और उसके ऊपर मूर्ति स्थापित करें। *मूर्ति के बांई तरफ तांबे या चांदी का जल कलश एवं दायीं तरफ अखंड दीपक स्थापित करें। *गणेश स्थापना में गौरी जी कि मूर्ति भी जरूर रखें । अगर मूर्ति नहीं ले रहे है तो सुपारी, चांदी का सिक्का या मिट्टी का प्रतिक बनाकर पूजा में रखें। *एक छोटा सा तांबे का नवग्रह यंत्र भी रखें। *पंचामृत से मूर्ति को स्नान करवाएं व भोग लगाएं *क्या चढ़ाना चाहिए? पीला सिंदूर, हल्दी, केसर, रोली, पीले अक्षत अवश्य अर्पित करें। *हरी एवं सफेद दूर्वा 11, 2, 108 श्रद्धानुसार चढ़ाये। * रक्त पुष्प विशेष कर गुड़हल का पुष्प और माला अवश्य अर्पित करें। * भोग लगाना है जरूरी- क्या करें अर्पण पान के पत्ते पर या नई कांसे/चांदी की कटोरी में शुद्ध घी के बूंदी या बेसन के 21 लड्डू एवं कैथा, केला व अन्य 5 फल अवश्य अर्पित करें। *मुख शुद्धि पान, सुपारी, लौंग, इलायची अर्पित करें। *यदि व्रत रख रहे हैं तो क्या खाना चाहिए? *गणेश जी के व्रत में सूर्योदय से चंद्रोदय तक ही खाना चाहिए। *जमीन के अंदर पैदा हुए कंद जैसे आलू, शकरकंद, मूंगफली, साबूदाना इत्यादि से बने पदार्थ एवं फलों का सेवन भोग लगाकर प्रसाद रूप में ग्रहण करना चाहिए। आइए जानते है इस वर्ष के गणेश स्थापना समय एवं मुहूर्त के बारे में महाराष्ट्र इत्यादि क्षेत्रो में भगवान गणेश कि पूजा प्रधानता से होती है, वहाँ आचार्य ब्रह्म मुहूर्त से ही पूजा प्ररम्भ करवा देते है | *विशेष मुहूर्त गणेश जी का जन्म मध्यान काल मे मानते हैं। इस वर्ष सुबह 11.03 - 13.30 तक का समय शुभ है इसमें भी *10.44 - 13.45 के बिच चर, लाभ, अमृत की होरा का शुभ समय मिल रहा है *10.15 - 12.17 चंद्र की होरा *11.49 (उन्चास) - 12.39 (उनतालीस) तक अभिजित मुहूर्त है। सबसे सर्वाधिक एवं महत्वपूर्ण मुहूर्त हैं - *12:00 - 13.40 के मध्य. इसमें आपको अभिजित मुहूर्त, अच्छा चौघड़िया, होरा एवम स्थिर वृश्चिक लग्न मिलेगा । ध्यान रखें 13.50 से 15.22 ये वर्जित काल है, यह राहुकाल है. अतः इसके पूर्व स्थापना अवश्य कर लें।

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