Utpanna Ekadashi Vrat Katha

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Shivangi

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जानिए सबसे अनोखी एकादशी "उत्पन्ना एकादशी" का महत्त्व एवं कथा..! यू तो एकादशी से सम्बंधित बहुत सारी व्रत कथाएं हैं लेकिन मार्गशीर्ष मास में आने वाली यह “उत्त्पन्नी एकादशी” का सबसे अलग ही महत्त्व है। ऐसा इसीलिए क्योंकि इसी दिन से एकादशी व्रत की शुरुआत हुई थी। इस दिन एकादशी माता का जन्म हुआ था इसीलिए इस एकादशी को उत्पन्न एकादशी के नाम से जाना गया। सतयुग में इसी एकादशी तिथि को भगवान विष्णु के शरीर से, उन्ही की रक्षा के लिए, एक देवी का जन्म हुआ था। इन देवी ने विष्णु जी के प्राणों की रक्षा की थी जिससे प्रसन्न होकर विष्णु जी ने इन्हें एकादशी नाम दिया। आइए जानते इससे जुड़ी कथा..!! एक बार मुर नामक असुर ने अपना आतंक हर जगह मचाया हुआ था। भगवान विष्णु ने उसके आतंक पर रोक लगाने के लिए उससे युद्ध किया. युद्घ करते हुए जब भगवान विष्णु थक गए तब बद्रीकाश्रम में एक गुफा में जाकर विश्राम करने लगे। मुर भगवान विष्णु का पीछा करता हुए बद्रीकाश्रम पहुंच गया। उसने जब भगवान विष्णु ने मारना चाहा तभी विष्णु भगवान के शरीर से एक देवी का जन्म हुआ और इस देवी ने मुर का वध कर दिया। देवी के कार्य से प्रसन्न होकर विष्णु भगवान ने कहा कि देवी तुम्हारा जन्म मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को हुआ है इसलिए तुम्हारा नाम एकादशी होगा। उन्होंने यह भी कहा की आज से प्रत्येक एकादशी को मेरे साथ तुम्हारी भी पूजा की जाएगी। जो भक्त एकादशी का व्रत रखेगा वह पापों से मुक्त हो जाएगा। इसलिए बाकी सभी एकादशी में इसका बड़ा महत्व है। एकादशी देवी विष्णु की माया से प्रकट हुई थी। जो व्यक्ति इस दिन उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखता वह विष्णु लोक में स्थान पाने योग्य बन जाता है। साथ ही साथ उसके सभी पापों से उसे मुक्ति मिलती है..! माना जाता है इस दिन व्रत करने से हजारों यज्ञों का फल भी मिलता है।

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