दिल को संवार गई

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दिल को संवार गई, जीवन निखार गई; प्यारी नजर ओशो की खुशियां बौछार गई। टूट गया सब सपना, मैं न रहा खुद अपना; कोई हवा इस मन का दर्पण बुहार गई। जीवन हुआ उजियारा, मिटा सकल अंधियारा; प्रेम आंगन में दियना सा बार गई। बांहों में उसकी छोड़ा, तैरा न भागा-दौड़ा; नदिया ही देखो मेरी नैया को तार गई। -ओशो शैलेन्द्र

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