माँ सिद्धिदात्री स्तुतिः

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सिद्धिदा स्तुतिः दुर्गमे दुस्तरे कार्ये भय - दुर्गविनाशिनी। प्रणमामि सदा भक्त्या दुर्गां दुर्गति -नाशिनीम्। । माता सिद्धिदात्री की चार भुजाए, वर्णरक्त, वाहनसिंह,कमल पुष्प पर आसीन एक हाथ मे कमल पुष्प, दूसरे हाथ मे चक्र, तीसरे हाथ मे गदा ओर चोथे हाथ मे शंख है | इनके नेत्रो मेकरुणा लहरा रही है | देवी प्रसन्न मुद्रा मे है | आराधना महत्व माता सिद्धिदात्री की आराधना से जातक को अणिमा, महिमा, प्राप्ति, प्रकाम्य, गरिमा, लघिमा, ईशित्व और वशित्व आदि समस्त सिद्धियो एवं नवनिधियो की प्राप्ति होती है | देवी की कृपा से विशुद्ध ज्ञानके द्वारा जीव अपने जीव भाव को त्यागकर जीवन मुक्ति प्राप्त करता है |

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